Tuesday, 15 March 2022

अब राशन की दुकानों पर कोटेदार राशन नहीं गाली देते हैं, गरीबों के हिस्से के रिफाइंड भी कमरे में रख ताली देते है।

साहब हम गरीब है,कौन सुनेगा हमारी बात।

होली में नहीं खाएंगे गोझिया और पापड़

दुकानदारों ने मारा पेट पर लात

अब राशन की दुकानों पर कोटेदार राशन नहीं गाली देते हैं,
गरीबों के हिस्से के रिफाइंड भी कमरे में रख ताली देते है


विंध्याचल। जहां एक तरफ सरकार ने गरीब जनता के लिए होली पर्व पर दिल खोलकर हर प्रकार से मदद देने का भरपूर प्रयास कर रही है और होली पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाए इसके लिए प्रत्येक यूनिट पर पांच किलो राशन,चना,रिफाइंड,नमक,चीनी दे रही है तो ऐसे में धूर्त और लुटेरे कोटेदारों ने भी अपनी सबसे घटिया कुकृत्य को करने में पीछे नहीं हट रहे है जरा सोचिए इस होली में हम और आप विभिन्न प्रकार के व्यंजनों को बनवा कर पर्व का आनंद अपने बच्चों के साथ मनाएंगे। क्या हमने कभी सोचा है कि जो गरीब परिवार का बच्चा इसी पर्व को भूखे रहकर मनाएगा नहीं ना तो आइए देखते है विंध्याचल रेलवे स्टेशन के पास एक मुसरहान बस्ती की जहां पर सरकार ने तो राशन कार्ड दिए है पर राशन के नाम पर उन्हें जिल्लतें ही मिलती है। इस होली पर सरकार ने गरीबों को और उनके बच्चों को पेट भरने के लिए प्रत्येक यूनिट पांच किलों राशन दे रही है तो वही इन गरीबों के और इनके मासूम बच्चों के हक और अधिकार को इनके पेट के राशन को कोटेदारों द्वारा जबरन छीना जा रहा है।

 विंध्याचल के रेलवे स्टेशन रोड पर बसा मुसरहान बस्ती में एक एक कार्ड पर जहां आठ से दस लोगों का नाम अंकित किए गए है लेकिन उन्हें धमकी देते हुए उनके हिस्से के दस, पंद्रह से बीस किलों तक के अनाज काटकर उन्हें मात्र दस किलो तो किसी को पंद्रह किलो अनाज देकर भगा दिया जा रहा है।ऐसा ही एक मामला प्रकाश में तब आया जब इसी बस्ती के विजय मुसहर के परिवार में छ सदस्य है और उन्हें मात्र पांच किलों गेहूं और पांच किलो चावल देकर भगा दिया जाता है जबकि उनके हिस्से का 20 किलो अनाज और रिफाइंड भी नहीं दिया जाता है।इसी बस्ती के जग्गा मुसहर के कार्ड पर छः लोगों का नाम चढ़ाया गया है लेकिन उन्हें दस किलो अनाज देकर भगा दिया गया। इसी बस्ती की एक वृद्ध महिला ने आरोप लगाया कि उसका राशन कार्ड भी बदल दिया गया है और उसके परिवार में कुल आठ सदस्य है और उन्हें सिर्फ दस किलो अनाज देकर भगा दिया जाता है और इसका विरोध करने पर उन्हें धमकी मिलती है कि भाग जाओ नहीं तो नाम भी कटवा देंगे और कुछ नहीं कर पाएगी। जबकि कुछ लोगों ने बताया कि साहब रिफाइंड तो आई है लेकिन सभी रिफाइंड के पैकेट को एक पास के कमरे में ताला बंद करके रखा गया है। *आखिर कैसे बचा जा सकता है इनके भ्रष्टाचारी चाल से,गरीब रो रहा है अपने ही खस्ताहाल पे।* जी हां ऐसे ही विंध्याचल के एक राशन कार्ड की दुकान पर गरीब मुसहर बस्ती के एक राशन कार्ड पर छः व्यक्तियों का नाम अंकित है लेकिन उन्हें राशन मिलता है 15 किलो।इसी तरह से किसी कार्ड से 10 किलो तो किसी के 5 किलो इसी प्रकार से प्रत्येक राशन कार्ड धारकों के साथ किया जा रहा है लेकिन इस पर न आज तक जिलापूर्ति अधिकारी न तो जनपद के आलालधिकारी का ध्यान इस ओर आकर्षित हो रहा है।ऐसे ही जनपद में राशन कार्ड दुकानदारों में आए दिन कभी गरीब जनता को पीट_पीट कर लहुलुहान भी कर दे रहे है। ऐसे ही कई मामले प्रकाश में आए है जिसको लेकर जनपद के जिम्मेदार विभाग के अधिकारी व जन प्रतिनिधि इस मामले में न जाने क्यों चुप्पी साध लेते है। इनके चुप रहने और इतनी बड़ी मामले में इनका बचकर निकल जाना और कोई हस्तक्षेप न करने से इनके भी ईमानदारी और सच्चाई पर सवालिया निशान बनते है। अभी फिलहाल में जहां भाजपा सरकार पहले से ही लोगों को आश्वासन दे रखा है कि "सोच ईमानदार और काम दमदार" पर पानी फेरते यह कोटेदारों के खिलाफ अभी तक ठोस कार्यवाही क्यों नहीं किया जाता है।जब भी कोई मामला उठा है तब तब आपसी लेन_देन पर मामला समझौता कर लिया जाता है जिससे जनता में सरकार और जिला प्रशासन के प्रति सोच में बदलाव आता जा रहा है कि वह कुछ भी कर लें पर उन्हें कहीं से भी न्याय नहीं मिलने वाला जिसके कारण यह कोटेदार अपनी मनमानी करने से बाज नहीं आते है और आए दिन कहीं न कहीं इनके काली करतूतों का ऑडियो और वीडियो वायरल होता रहता है।किसी वीडियो में यह आलाधिकारियों को खरीदने की बात कहते है तो कहीं तानाशाही रवैया अपनाते हुए घटतौलिया करते है तो कहीं यह सीधे और प्रत्यक्ष रूप से 30 किलो की बजाय जबरन 10 किलो राशन देकर भगा दे रहे है।आखिर गरीबों को कौन सी सरकार इंसाफ दिलाएगी इनकी इस काला बाजारी और हड़पकारी नीति से।

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