द कश्मीर फाइल का सिनेमा घर पर पोस्टर न लगने से युवाओं में आक्रोश
✍️रामलाल साहनी
मीरजापुर। सिनेमा घर से जैसे ही दर्शक कश्मीर फाइल को देखने बाद आते है। युवाओं के खून खौल रहे थे तो वही वृद्ध व बुद्धजीवियों के आत्मा एकदम से द्रवित हो उठे थे वही कुछ युवाओं ने मोदी,योगी के जय जयकारे लगा रहे थे तो कोई वंदे मातरम की जय घोष कर रहा था। यह उस समय के हालात थे जब मीरजापुर के एक सिनेमा घर से बहुत से दर्शक किसी सिनेमा घर में बहुत ही शांति से और बिना शोर किए ही पूरी फिल्म देखते है और फिल्म देखने के बाद खुद अपने आत्मा से सवाल करते है और अपने मन में इस फिल्म की समीक्षा भी करते देखे गए। यह पहला वाकया था जहां दर्शक ताली नहीं बजा रहे थे बल्कि अपने अतर्रात्मा से प्रश्न कर रहे थे कि यह फिल्म सिटी वाले यह इस तरह के हकीकत को दर्शकों से कैसे दूर रखते है और मीडिया ऐसे फिल्मों को क्यों तवज्जों नही देते है। आखिर इतनी बड़ी सच्चाई को लोगों से कैसे दूर रखा गया। इस दौरान फिल्म देखने के लिए आए *शिवराम शर्मा जी से बात किया गया तो उन्होंने कहा कि ऐसी फिल्म लोगों को बनाना चाहिए जिससे युवा देश की सच्ची इतिहास को जान सके जो उन्हें आजतक पढ़ाया ही नहीं गया था*। देश की सच्ची घटना को वह जान सके जिससे वह अछूते रह गए है।उन्होंने फिल्म की अंतिम दृश्य को देखने के बाद कहा कि गर्मजोशी और कड़ी आवाज में कहते है कि इस फिल्म को हम सभी भारतीयों को देखना चाहिए और लोगों को दिखाना भी चाहिए ताकि वह भी इस सच्चाई से अछूते न रह सके। *कृष्ण कुमार अग्रहरी ने कहा कि इस फिल्म के माध्यम से न सिर्फ कश्मीर की सच्चाई बताई गई है बल्कि देश की बड़ी यूनिवर्सिटी की पोल भी खोलती है।*
*कश्मीर फाइल की एक भी पोस्ट बैनर बाहर न लगे होने कारण कुछ लोगों ने नाराजगी व्यक्त किया*
फिल्म देखने के बाद बाहर निकले कुछ युवा दर्शकों ने नाराजगी व्यक्त करते हुए सिनेमा घर में लगे कुछ दूसरे फिल्म के पोस्टरों को फाड़कर सिनेमा घर में लगे फिल्म कश्मीर फाइल की पोस्टर बैनर लगवाने के लिए जिद्द करने लगे।इस दौरान पुलिस को सूचना देकर बुलाया गया मौके पर पहुंची स्थानीय पुलिस ने भीड़ को हटाया और सिनेमा घर के स्वामी को बुलवाया और। इसके बारे में पुछतास किया तो उन्होंने बताया कि यह फिल्म दर्शकों की अधिक मांग पर लगवाया गया है।पेंटर नहीं है पेंटर के आने के बाद पोस्टर लगा दिया जायेगा।हालांकि सिनेमा घर के स्वामी भी उग्र होते देखे गए और उन्होंने कुछ मीडिया के लोगों पर आरोप लगाया की कुछ लोग फ्री में हमसे फिल्म देखने की मांग किया और हमने उनके बातो से मना किया तो वह लोग इस तरह के कृत्य किए है।
वही सिनेमा देखकर बाहर निकले हिंदू समाज के अध्यक्ष *राजेंद्र प्रजापति ने मीडिया से बात कर बताया कि जब इस फिल्म को देश के प्रधानमंत्री ने प्रमोट किया है तो इस फिल्म का बैनर और पोस्टर बाहर क्यों नहीं लगाया गया है अगर कल तक बैनर नहीं लगा तो हम यही बैठकर धरना देंगे और पोस्टर लगवा कर ही दम लेंगे। बताते चले की जब इनसे फिल्म के बारे में बात किया तो यह भावुक होते हुए रोने लगे और कहने लगे की इस तरह से कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार देख कर मेरे रोंगटे खड़े हो गए*।उन्होंने मीरजापुर की जनता से इस फिल्म को देखने के लिए लोगों से अपील किया है और उत्तर प्रदेश सरकार से इस फिल्म को टैक्स फ्री करने के लिए भी अपील किए। इस फिल्म को लेकर जब विंध्याचल के एक *युवा सोमेश्वरपति त्रिपाठी जी से बात किया गया तो उन्होंने कहा कि इस तरह के जुल्म देखने के बाद तो मेरा खून ही खौल जाता है उन कट्टर इस्लामिक आतंकवादियों पर जिन्होंने धर्म की आड़ में हिंदुओं पर अत्याचार किया और दिल्ली में जो बड़ी यूनिवर्सिटी देश विरोधी नारे लगवा रहे है। ऐसे यूनिवर्सिटी को बंद कर देना चाहिए* जहां भारत के खिलाफ युवाओं को भड़काया और बर्गलाया जा रहा है।विंध्याचल के एक अध्यापक से बात किया जो फिल्म देखकर बाहर आए थे। *राकेश कुमार वर्मा जी ने कहा कि इस फिल्म सीटी में कट्टर इस्लामियों का बोलबाला है जो सभी सिनेमा घरों को दबाया जा रहा है कि इस फिल्म को न दिखाया जाय और इसका प्रचार प्रसार भी नहीं करने दे रहे है यहां तक कि जब कोई फिल्म लगती है तो उससे पहले उस फिल्म का बड़ा बड़ा बैनर लगवाया जाता है और उसका खून प्रचार प्रसार भी किया जाता है लेकिन इस फिल्म को लेकर अब हम कह सकते है की जो फिल्में हमे सिनेमा घरों में दिखाया जाता है वह कट्टर इसामियों के सह पर और उसके इच्छानुसार ही दिखाया जाता है,पहले की फिल्मों में जब श्लोक *"वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ" से फिल्म की शुरुवात होती थी तो कितना अच्छा लगता था* लेकिन अब तो एकदम से इसके विपरित ही हो गया है। रामधनी पाल ने कहा की जब किसी खान लोगों की फिल्म सिनेमा घरों में लगता है तो खूब प्रचार प्रसार और सिनेमा*द कश्मीर फाइल का सिनेमा घर पर पोस्टर न लगने से युवाओं में आक्रोश*
मीरजापुर। सिनेमा घर से जैसे ही दर्शक कश्मीर फाइल को देखने बाद आते है। युवाओं के खून खौल रहे थे तो वही वृद्ध व बुद्धजीवियों के आत्मा एकदम से द्रवित हो उठे थे वही कुछ युवाओं ने मोदी,योगी के जय जयकारे लगा रहे थे तो कोई वंदे मातरम की जय घोष कर रहा था। यह उस समय के हालात थे जब मीरजापुर के एक सिनेमा घर से बहुत से दर्शक किसी सिनेमा घर में बहुत ही शांति से और बिना शोर किए ही पूरी फिल्म देखते है और फिल्म देखने के बाद खुद अपने आत्मा से सवाल करते है और अपने मन में इस फिल्म की समीक्षा भी करते देखे गए। यह पहला वाकया था जहां दर्शक ताली नहीं बजा रहे थे बल्कि अपने अतर्रात्मा से प्रश्न कर रहे थे कि यह फिल्म सिटी वाले यह इस तरह के हकीकत को दर्शकों से कैसे दूर रखते है और मीडिया ऐसे फिल्मों को क्यों तवज्जों नही देते है। आखिर इतनी बड़ी सच्चाई को लोगों से कैसे दूर रखा गया। इस दौरान फिल्म देखने के लिए आए शिवराम शर्मा जी से बात किया गया तो उन्होंने कहा कि ऐसी फिल्म लोगों को बनाना चाहिए जिससे युवा देश की सच्ची इतिहास को जान सके जो उन्हें आजतक पढ़ाया ही नहीं गया था। देश की सच्ची घटना को वह जान सके जिससे वह अछूते रह गए है।उन्होंने फिल्म की अंतिम दृश्य को देखने के बाद कहा कि गर्मजोशी और कड़ी आवाज में कहते है कि इस फिल्म को हम सभी भारतीयों को देखना चाहिए और लोगों को दिखाना भी चाहिए ताकि वह भी इस सच्चाई से अछूते न रह सके। कृष्ण कुमार अग्रहरी ने कहा कि इस फिल्म के माध्यम से न सिर्फ कश्मीर की सच्चाई बताई गई है बल्कि देश की बड़ी यूनिवर्सिटी की पोल भी खोलती है।
*कश्मीर फाइल की एक भी पोस्ट बैनर बाहर न लगे होने कारण कुछ लोगों ने नाराजगी व्यक्त किया*
फिल्म देखने के बाद बाहर निकले कुछ युवा दर्शकों ने नाराजगी व्यक्त करते हुए सिनेमा घर में लगे कुछ दूसरे फिल्म के पोस्टरों को फाड़कर सिनेमा घर में लगे फिल्म कश्मीर फाइल की पोस्टर बैनर लगवाने के लिए जिद्द करने लगे।इस दौरान पुलिस को सूचना देकर बुलाया गया मौके पर पहुंची स्थानीय पुलिस ने भीड़ को हटाया और सिनेमा घर के स्वामी को बुलवाया और। इसके बारे में पुछतास किया तो उन्होंने बताया कि यह फिल्म दर्शकों की अधिक मांग पर लगवाया गया है।पेंटर नहीं है पेंटर के आने के बाद पोस्टर लगा दिया जायेगा।हालांकि सिनेमा घर के स्वामी भी उग्र होते देखे गए और उन्होंने कुछ मीडिया के लोगों पर आरोप लगाया की कुछ लोग फ्री में हमसे फिल्म देखने की मांग किया और हमने उनके बातो से मना किया तो वह लोग इस तरह के कृत्य किए है।
वही सिनेमा देखकर बाहर निकले हिंदू समाज के अध्यक्ष राजेंद्र प्रजापति ने मीडिया से बात कर बताया कि जब इस फिल्म को देश के प्रधानमंत्री ने प्रमोट किया है तो इस फिल्म का बैनर और पोस्टर बाहर क्यों नहीं लगाया गया है अगर कल तक बैनर नहीं लगा तो हम यही बैठकर धरना देंगे और पोस्टर लगवा कर ही दम लेंगे। बताते चले की जब इनसे फिल्म के बारे में बात किया तो यह भावुक होते हुए रोने लगे और कहने लगे की इस तरह से कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार देख कर मेरे रोंगटे खड़े हो गए।उन्होंने मीरजापुर की जनता से इस फिल्म को देखने के लिए लोगों से अपील किया है और उत्तर प्रदेश सरकार से इस फिल्म को टैक्स फ्री करने के लिए भी अपील किए। इस फिल्म को लेकर जब विंध्याचल के एक युवा सोमेश्वरपति त्रिपाठी जी से बात किया गया तो उन्होंने कहा कि इस तरह के जुल्म देखने के बाद तो मेरा खून ही खौल जाता है उन कट्टर इस्लामिक आतंकवादियों पर जिन्होंने धर्म की आड़ में हिंदुओं पर अत्याचार किया और दिल्ली में जो बड़ी यूनिवर्सिटी देश विरोधी नारे लगवा रहे है ऐसे यूनिवर्सिटी को बंद कर देना चाहिए जहां भारत के खिलाफ युवाओं को भड़काया और बर्गलाया जा रहा है।विंध्याचल के एक अध्यापक से बात किया जो फिल्म देखकर बाहर आए थे राकेश कुमार वर्मा जी ने कहा कि इस फिल्म सीटी में कट्टर इस्लामियों का बोलबाला है जो सभी सिनेमा घरों को दबाया जा रहा है कि इस फिल्म को न दिखाया जाय और इसका प्रचार प्रसार भी नहीं करने दे रहे है यहां तक कि जब कोई फिल्म लगती है तो उससे पहले उस फिल्म का बड़ा बड़ा बैनर लगवाया जाता है और उसका खून प्रचार प्रसार भी किया जाता है लेकिन इस फिल्म को लेकर अब हम कह सकते है की जो फिल्में हमे सिनेमा घरों में दिखाया जाता है वह कट्टर इसामियों के सह पर और उसके कथनानुसार ही दिखाया जाता है,पहले की फिल्मों में जब श्लोक "वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ" से फिल्म की शुरुवात होती थी तो कितना अच्छा लगता था लेकिन अब तो एकदम से इसके विपरित ही हो गया है। *रामधनी पाल* ने कहा की जब किसी खान लोगों की फिल्म सिनेमा घरों में लगता है तो खूब प्रचार प्रसार और सिनेमा घरों पर बड़े बड़े बैनर और पोस्टर लगाए जाते है और *इस फिल्म के स्मामियों द्वारा न जाने किसके डर से इतनी उपेक्षा क्यों कर रहे है पता नहीं।*