Friday, 18 March 2022

बचपन की पिचकारी

*✍️रामलाल साहनी*

*बचपन की पिचकारी*

*🙏मां,बापू जी को समर्पित🙏*

बचपन की वह पिचकारी ।
जिसे खरीदने में थी लाचारी ।।
मां, बाबू जी थे गरीब,
फिर भी इच्छा पूरी की सारी।
               बचपन की वह पिचकारी...
               जिसे खरीदने में थी लाचारी.
सात रुपए की आती थी,
बोतल में भरी जाती थी।
थी स्टील की, थोड़ा सा,
पाइप भी लगाई जाती थी।

       कुछ ऐसी ही थी वह पिचकारी,             

        जिसे खरीदने में थी लाचारी।

होली में पिचकारी नही आया था,i
रो_रो कर खूब मैं छैलाया था।

सात रुपए की बजाय

सिर्फ पांच रुपए ही पाया था।
नहीं समझ सका था उस समय
   मां,बापू की सिसकारी।

           बचपन की वह पिचकारी,
            जिसे खरीदने में थी लाचारी।

भले नहीं बनते थे घर पर,
गुझिया,पापड़ और पुड़ी
होली से पहले दिलाते थे
नए कपड़े,रंग और पुचकी
मां,बापू के द्वारा ही मिलती थी,
बचपन में मनचाही त्योहारी।
               बचपन की वह पिचकारी,
              जिसे खरीदने में थी लाचारी।
नहीं लगाया था रंग, फिर भी
आंसुओं से चेहरा धोया हूं,
आज आप दोनो की याद में
खूब जी भर कर रोया हूं।
जब नहीं है पास आप दोनों
अब बतानी है अपनी दुखसारी।

             बचपन की वह पिचकारी,
              जिसे खरीदने में थी लाचारी

Tuesday, 15 March 2022

अब राशन की दुकानों पर कोटेदार राशन नहीं गाली देते हैं, गरीबों के हिस्से के रिफाइंड भी कमरे में रख ताली देते है।

साहब हम गरीब है,कौन सुनेगा हमारी बात।

होली में नहीं खाएंगे गोझिया और पापड़

दुकानदारों ने मारा पेट पर लात

अब राशन की दुकानों पर कोटेदार राशन नहीं गाली देते हैं,
गरीबों के हिस्से के रिफाइंड भी कमरे में रख ताली देते है


विंध्याचल। जहां एक तरफ सरकार ने गरीब जनता के लिए होली पर्व पर दिल खोलकर हर प्रकार से मदद देने का भरपूर प्रयास कर रही है और होली पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाए इसके लिए प्रत्येक यूनिट पर पांच किलो राशन,चना,रिफाइंड,नमक,चीनी दे रही है तो ऐसे में धूर्त और लुटेरे कोटेदारों ने भी अपनी सबसे घटिया कुकृत्य को करने में पीछे नहीं हट रहे है जरा सोचिए इस होली में हम और आप विभिन्न प्रकार के व्यंजनों को बनवा कर पर्व का आनंद अपने बच्चों के साथ मनाएंगे। क्या हमने कभी सोचा है कि जो गरीब परिवार का बच्चा इसी पर्व को भूखे रहकर मनाएगा नहीं ना तो आइए देखते है विंध्याचल रेलवे स्टेशन के पास एक मुसरहान बस्ती की जहां पर सरकार ने तो राशन कार्ड दिए है पर राशन के नाम पर उन्हें जिल्लतें ही मिलती है। इस होली पर सरकार ने गरीबों को और उनके बच्चों को पेट भरने के लिए प्रत्येक यूनिट पांच किलों राशन दे रही है तो वही इन गरीबों के और इनके मासूम बच्चों के हक और अधिकार को इनके पेट के राशन को कोटेदारों द्वारा जबरन छीना जा रहा है।

 विंध्याचल के रेलवे स्टेशन रोड पर बसा मुसरहान बस्ती में एक एक कार्ड पर जहां आठ से दस लोगों का नाम अंकित किए गए है लेकिन उन्हें धमकी देते हुए उनके हिस्से के दस, पंद्रह से बीस किलों तक के अनाज काटकर उन्हें मात्र दस किलो तो किसी को पंद्रह किलो अनाज देकर भगा दिया जा रहा है।ऐसा ही एक मामला प्रकाश में तब आया जब इसी बस्ती के विजय मुसहर के परिवार में छ सदस्य है और उन्हें मात्र पांच किलों गेहूं और पांच किलो चावल देकर भगा दिया जाता है जबकि उनके हिस्से का 20 किलो अनाज और रिफाइंड भी नहीं दिया जाता है।इसी बस्ती के जग्गा मुसहर के कार्ड पर छः लोगों का नाम चढ़ाया गया है लेकिन उन्हें दस किलो अनाज देकर भगा दिया गया। इसी बस्ती की एक वृद्ध महिला ने आरोप लगाया कि उसका राशन कार्ड भी बदल दिया गया है और उसके परिवार में कुल आठ सदस्य है और उन्हें सिर्फ दस किलो अनाज देकर भगा दिया जाता है और इसका विरोध करने पर उन्हें धमकी मिलती है कि भाग जाओ नहीं तो नाम भी कटवा देंगे और कुछ नहीं कर पाएगी। जबकि कुछ लोगों ने बताया कि साहब रिफाइंड तो आई है लेकिन सभी रिफाइंड के पैकेट को एक पास के कमरे में ताला बंद करके रखा गया है। *आखिर कैसे बचा जा सकता है इनके भ्रष्टाचारी चाल से,गरीब रो रहा है अपने ही खस्ताहाल पे।* जी हां ऐसे ही विंध्याचल के एक राशन कार्ड की दुकान पर गरीब मुसहर बस्ती के एक राशन कार्ड पर छः व्यक्तियों का नाम अंकित है लेकिन उन्हें राशन मिलता है 15 किलो।इसी तरह से किसी कार्ड से 10 किलो तो किसी के 5 किलो इसी प्रकार से प्रत्येक राशन कार्ड धारकों के साथ किया जा रहा है लेकिन इस पर न आज तक जिलापूर्ति अधिकारी न तो जनपद के आलालधिकारी का ध्यान इस ओर आकर्षित हो रहा है।ऐसे ही जनपद में राशन कार्ड दुकानदारों में आए दिन कभी गरीब जनता को पीट_पीट कर लहुलुहान भी कर दे रहे है। ऐसे ही कई मामले प्रकाश में आए है जिसको लेकर जनपद के जिम्मेदार विभाग के अधिकारी व जन प्रतिनिधि इस मामले में न जाने क्यों चुप्पी साध लेते है। इनके चुप रहने और इतनी बड़ी मामले में इनका बचकर निकल जाना और कोई हस्तक्षेप न करने से इनके भी ईमानदारी और सच्चाई पर सवालिया निशान बनते है। अभी फिलहाल में जहां भाजपा सरकार पहले से ही लोगों को आश्वासन दे रखा है कि "सोच ईमानदार और काम दमदार" पर पानी फेरते यह कोटेदारों के खिलाफ अभी तक ठोस कार्यवाही क्यों नहीं किया जाता है।जब भी कोई मामला उठा है तब तब आपसी लेन_देन पर मामला समझौता कर लिया जाता है जिससे जनता में सरकार और जिला प्रशासन के प्रति सोच में बदलाव आता जा रहा है कि वह कुछ भी कर लें पर उन्हें कहीं से भी न्याय नहीं मिलने वाला जिसके कारण यह कोटेदार अपनी मनमानी करने से बाज नहीं आते है और आए दिन कहीं न कहीं इनके काली करतूतों का ऑडियो और वीडियो वायरल होता रहता है।किसी वीडियो में यह आलाधिकारियों को खरीदने की बात कहते है तो कहीं तानाशाही रवैया अपनाते हुए घटतौलिया करते है तो कहीं यह सीधे और प्रत्यक्ष रूप से 30 किलो की बजाय जबरन 10 किलो राशन देकर भगा दे रहे है।आखिर गरीबों को कौन सी सरकार इंसाफ दिलाएगी इनकी इस काला बाजारी और हड़पकारी नीति से।

द कश्मीर फाइल का सिनेमा घर पर पोस्टर न लगने से युवाओं में आक्रोश

द कश्मीर फाइल का सिनेमा घर पर पोस्टर न लगने से युवाओं में आक्रोश
                
                    ✍️रामलाल साहनी
मीरजापुर। सिनेमा घर से जैसे ही दर्शक कश्मीर फाइल को देखने बाद आते है। युवाओं के खून खौल रहे थे तो वही वृद्ध व बुद्धजीवियों के आत्मा एकदम से द्रवित हो उठे थे वही कुछ युवाओं ने मोदी,योगी के जय जयकारे लगा रहे थे तो कोई वंदे मातरम की जय घोष कर रहा था। यह उस समय के हालात थे जब मीरजापुर के एक सिनेमा घर से बहुत से दर्शक किसी सिनेमा घर में बहुत ही शांति से और बिना शोर किए ही पूरी फिल्म देखते है और फिल्म देखने के बाद खुद अपने आत्मा से सवाल करते है और अपने मन में इस फिल्म की समीक्षा भी करते देखे गए। यह पहला वाकया था जहां दर्शक ताली नहीं बजा रहे थे बल्कि अपने अतर्रात्मा से प्रश्न कर रहे थे कि यह फिल्म सिटी वाले यह इस तरह के हकीकत को दर्शकों से कैसे दूर रखते है और मीडिया ऐसे फिल्मों को क्यों तवज्जों नही देते है। आखिर इतनी बड़ी सच्चाई को लोगों से कैसे दूर रखा गया। इस दौरान फिल्म देखने के लिए आए *शिवराम शर्मा जी से बात किया गया तो उन्होंने कहा कि ऐसी फिल्म लोगों को बनाना चाहिए जिससे युवा देश की सच्ची इतिहास को जान सके जो उन्हें आजतक पढ़ाया ही नहीं गया था*। देश की सच्ची घटना को वह जान सके जिससे वह अछूते रह गए है।उन्होंने फिल्म की अंतिम दृश्य को देखने के बाद कहा कि गर्मजोशी और कड़ी आवाज में कहते है कि इस फिल्म को हम सभी भारतीयों को देखना चाहिए और लोगों को दिखाना भी चाहिए ताकि वह भी इस सच्चाई से अछूते न रह सके। *कृष्ण कुमार अग्रहरी ने कहा कि इस फिल्म के माध्यम से न सिर्फ कश्मीर की सच्चाई बताई गई है बल्कि देश की बड़ी यूनिवर्सिटी की पोल भी खोलती है।*

*कश्मीर फाइल की एक भी पोस्ट बैनर बाहर न लगे होने कारण कुछ लोगों ने नाराजगी व्यक्त किया*

फिल्म देखने के बाद बाहर निकले कुछ युवा दर्शकों ने नाराजगी व्यक्त करते हुए सिनेमा घर में लगे कुछ दूसरे फिल्म के पोस्टरों को फाड़कर सिनेमा घर में लगे फिल्म कश्मीर फाइल की पोस्टर बैनर लगवाने के लिए जिद्द करने लगे।इस दौरान पुलिस को सूचना देकर बुलाया गया मौके पर पहुंची स्थानीय पुलिस ने भीड़ को हटाया और सिनेमा घर के स्वामी को बुलवाया और। इसके बारे में पुछतास किया तो उन्होंने बताया कि यह फिल्म दर्शकों की अधिक मांग पर लगवाया गया है।पेंटर नहीं है पेंटर के आने के बाद पोस्टर लगा दिया जायेगा।हालांकि सिनेमा घर के स्वामी भी उग्र होते देखे गए और उन्होंने कुछ मीडिया के लोगों पर आरोप लगाया की कुछ लोग फ्री में हमसे फिल्म देखने की मांग किया और हमने उनके बातो से मना किया तो वह लोग इस तरह के कृत्य किए है।
वही सिनेमा देखकर बाहर निकले हिंदू समाज के अध्यक्ष *राजेंद्र प्रजापति ने मीडिया से बात कर बताया कि जब इस फिल्म को देश के प्रधानमंत्री ने प्रमोट किया है तो इस फिल्म का बैनर और पोस्टर बाहर क्यों नहीं लगाया गया है अगर कल तक बैनर नहीं लगा तो हम यही बैठकर धरना देंगे और पोस्टर लगवा कर ही दम लेंगे। बताते चले की जब इनसे फिल्म के बारे में बात किया तो यह भावुक होते हुए रोने लगे और कहने लगे की इस तरह से कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार देख कर मेरे रोंगटे खड़े हो गए*।उन्होंने मीरजापुर की जनता से इस फिल्म को देखने के लिए लोगों से अपील किया है और उत्तर प्रदेश सरकार से इस फिल्म को टैक्स फ्री करने के लिए भी अपील किए। इस फिल्म को लेकर जब विंध्याचल के एक *युवा सोमेश्वरपति त्रिपाठी जी से बात किया गया तो उन्होंने कहा कि इस तरह के जुल्म देखने के बाद तो मेरा खून ही खौल जाता है उन कट्टर इस्लामिक आतंकवादियों पर जिन्होंने धर्म की आड़ में हिंदुओं पर अत्याचार किया और दिल्ली में जो बड़ी यूनिवर्सिटी देश विरोधी नारे लगवा रहे है। ऐसे यूनिवर्सिटी को बंद कर देना चाहिए* जहां भारत के खिलाफ युवाओं को भड़काया और बर्गलाया जा रहा है।विंध्याचल के एक अध्यापक से बात किया जो फिल्म देखकर बाहर आए थे। *राकेश कुमार वर्मा जी ने कहा कि इस फिल्म सीटी में कट्टर इस्लामियों का बोलबाला है जो सभी सिनेमा घरों को दबाया जा रहा है कि इस फिल्म को न दिखाया जाय और इसका प्रचार प्रसार भी नहीं करने दे रहे है यहां तक कि जब कोई फिल्म लगती है तो उससे  पहले उस फिल्म का बड़ा बड़ा बैनर लगवाया जाता है और उसका खून प्रचार प्रसार भी किया जाता है लेकिन इस फिल्म को लेकर अब हम कह सकते है की जो फिल्में हमे सिनेमा घरों में दिखाया जाता है वह कट्टर इसामियों के सह पर और उसके इच्छानुसार ही दिखाया जाता है,पहले की फिल्मों में जब श्लोक *"वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ" से फिल्म की शुरुवात होती थी तो कितना अच्छा लगता था* लेकिन अब तो एकदम से इसके विपरित ही हो गया है। रामधनी पाल ने कहा की जब किसी खान लोगों की फिल्म सिनेमा घरों में लगता है तो खूब प्रचार प्रसार और सिनेमा*द कश्मीर फाइल का सिनेमा घर पर पोस्टर न लगने से युवाओं में आक्रोश*

मीरजापुर। सिनेमा घर से जैसे ही दर्शक कश्मीर फाइल को देखने बाद आते है। युवाओं के खून खौल रहे थे तो वही वृद्ध व बुद्धजीवियों के आत्मा एकदम से द्रवित हो उठे थे वही कुछ युवाओं ने मोदी,योगी के जय जयकारे लगा रहे थे तो कोई वंदे मातरम की जय घोष कर रहा था। यह उस समय के हालात थे जब मीरजापुर के एक सिनेमा घर से बहुत से दर्शक किसी सिनेमा घर में बहुत ही शांति से और बिना शोर किए ही पूरी फिल्म देखते है और फिल्म देखने के बाद खुद अपने आत्मा से सवाल करते है और अपने मन में इस फिल्म की समीक्षा भी करते देखे गए। यह पहला वाकया था जहां दर्शक ताली नहीं बजा रहे थे बल्कि अपने अतर्रात्मा से प्रश्न कर रहे थे कि यह फिल्म सिटी वाले यह इस तरह के हकीकत को दर्शकों से कैसे दूर रखते है और मीडिया ऐसे फिल्मों को क्यों तवज्जों नही देते है। आखिर इतनी बड़ी सच्चाई को लोगों से कैसे दूर रखा गया। इस दौरान फिल्म देखने के लिए आए शिवराम शर्मा जी से बात किया गया तो उन्होंने कहा कि ऐसी फिल्म लोगों को बनाना चाहिए जिससे युवा देश की सच्ची इतिहास को जान सके जो उन्हें आजतक पढ़ाया ही नहीं गया था। देश की सच्ची घटना को वह जान सके जिससे वह अछूते रह गए है।उन्होंने फिल्म की अंतिम दृश्य को देखने के बाद कहा कि गर्मजोशी और कड़ी आवाज में कहते है कि इस फिल्म को हम सभी भारतीयों को देखना चाहिए और लोगों को दिखाना भी चाहिए ताकि वह भी इस सच्चाई से अछूते न रह सके। कृष्ण कुमार अग्रहरी ने कहा कि इस फिल्म के माध्यम से न सिर्फ कश्मीर की सच्चाई बताई गई है बल्कि देश की बड़ी यूनिवर्सिटी की पोल भी खोलती है। 

*कश्मीर फाइल की एक भी पोस्ट बैनर बाहर न लगे होने कारण कुछ लोगों ने नाराजगी व्यक्त किया*

फिल्म देखने के बाद बाहर निकले कुछ युवा दर्शकों ने नाराजगी व्यक्त करते हुए सिनेमा घर में लगे कुछ दूसरे फिल्म के पोस्टरों को फाड़कर सिनेमा घर में लगे फिल्म कश्मीर फाइल की पोस्टर बैनर लगवाने के लिए जिद्द करने लगे।इस दौरान पुलिस को सूचना देकर बुलाया गया मौके पर पहुंची स्थानीय पुलिस ने भीड़ को हटाया और सिनेमा घर के स्वामी को बुलवाया और। इसके बारे में पुछतास किया तो उन्होंने बताया कि यह फिल्म दर्शकों की अधिक मांग पर लगवाया गया है।पेंटर नहीं है पेंटर के आने के बाद पोस्टर लगा दिया जायेगा।हालांकि सिनेमा घर के स्वामी भी उग्र होते देखे गए और उन्होंने कुछ मीडिया के लोगों पर आरोप लगाया की कुछ लोग फ्री में हमसे फिल्म देखने की मांग किया और हमने उनके बातो से मना किया तो वह लोग इस तरह के कृत्य किए है।
वही सिनेमा देखकर बाहर निकले हिंदू समाज के अध्यक्ष राजेंद्र प्रजापति ने मीडिया से बात कर बताया कि जब इस फिल्म को देश के प्रधानमंत्री ने प्रमोट किया है तो इस फिल्म का बैनर और पोस्टर बाहर क्यों नहीं लगाया गया है अगर कल तक बैनर नहीं लगा तो हम यही बैठकर धरना देंगे और पोस्टर लगवा कर ही दम लेंगे। बताते चले की जब इनसे फिल्म के बारे में बात किया तो यह भावुक होते हुए रोने लगे और कहने लगे की इस तरह से कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार देख कर मेरे रोंगटे खड़े हो गए।उन्होंने मीरजापुर की जनता से इस फिल्म को देखने के लिए लोगों से अपील किया है और उत्तर प्रदेश सरकार से इस फिल्म को टैक्स फ्री करने के लिए भी अपील किए। इस फिल्म को लेकर जब विंध्याचल के एक युवा सोमेश्वरपति त्रिपाठी जी से बात किया गया तो उन्होंने कहा कि इस तरह के जुल्म देखने के बाद तो मेरा खून ही खौल जाता है उन कट्टर इस्लामिक आतंकवादियों पर जिन्होंने धर्म की आड़ में हिंदुओं पर अत्याचार किया और दिल्ली में जो बड़ी यूनिवर्सिटी देश विरोधी नारे लगवा रहे है ऐसे यूनिवर्सिटी को बंद कर देना चाहिए जहां भारत के खिलाफ युवाओं को भड़काया और बर्गलाया जा रहा है।विंध्याचल के एक अध्यापक से बात किया जो फिल्म देखकर बाहर आए थे राकेश कुमार वर्मा जी ने कहा कि इस फिल्म सीटी में कट्टर इस्लामियों का बोलबाला है जो सभी सिनेमा घरों को दबाया जा रहा है कि इस फिल्म को न दिखाया जाय और इसका प्रचार प्रसार भी नहीं करने दे रहे है यहां तक कि जब कोई फिल्म लगती है तो उससे  पहले उस फिल्म का बड़ा बड़ा बैनर लगवाया जाता है और उसका खून प्रचार प्रसार भी किया जाता है लेकिन इस फिल्म को लेकर अब हम कह सकते है की जो फिल्में हमे सिनेमा घरों में दिखाया जाता है वह कट्टर इसामियों के सह पर और उसके कथनानुसार ही दिखाया जाता है,पहले की फिल्मों में जब श्लोक "वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ" से फिल्म की शुरुवात होती थी तो कितना अच्छा लगता था लेकिन अब तो एकदम से इसके विपरित ही हो गया है। *रामधनी पाल* ने कहा की जब किसी खान लोगों की फिल्म सिनेमा घरों में लगता है तो खूब प्रचार प्रसार और सिनेमा घरों पर बड़े बड़े बैनर और पोस्टर लगाए जाते है और *इस फिल्म के स्मामियों द्वारा न जाने किसके डर से इतनी उपेक्षा क्यों कर रहे है पता नहीं।*